google.com, pub-4835475085531812, DIRECT, f08c47fec0942fa0 अयोध्या में रामलला प्रतिष्ठा दिवस 2026: दूसरी वर्षगांठ पर भव्य उत्सव और श्रद्धालुओं का सैलाब

अयोध्या में रामलला प्रतिष्ठा दिवस 2026: दूसरी वर्षगांठ पर भव्य उत्सव और श्रद्धालुओं का सैलाब

🌺 अयोध्या में रामलला प्रतिष्ठा दिवस 2026: ऐतिहासिक उत्सव, भव्य तैयारियाँ और श्रद्धालुओं का अपार सैलाब





अयोध्या, उत्तर प्रदेश – 22 जनवरी 2026:

देश और विश्व की आस्था का केंद्र अयोध्या आज एक बार फिर रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ के भव्य पर्व से गूंज रहा है। यह वही दिन है जब 22 जनवरी 2024 को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में लंबे समय की प्रतीक्षा के बाद प्रभु श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई थी — एक ऐतिहासिक क्षण जिसने भारतीय संस्कृति, धर्म और सामाजिक भावना में गहरी ऊर्जा पैदा कर दी थी।

आज का दिन श्रद्धा, भक्ति, संस्कृति और राष्ट्रीय ऐक्य का अद्वितीय संगम बन चुका है, जहाँ लाखों भक्तों ने अपने पवित्र भाव से रामलला को नमन करने के लिए अयोध्या का रुख किया है। इस उत्सव ने न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे भारत और विदेशों में बसे रामभक्तों के दिलों में एक अनोखी उत्साह‑लहर पैदा कर दी है।


🙏 रामलला प्रतिष्ठा दिवस — क्यों है यह दिन इतना महत्वपूर्ण?

रामलला प्रतिष्ठा दिवस वह दिव्य दिन है जब भगवान श्री राम को उनके जन्मस्थल अयोध्या में उनके छोटे रूप ‘रामलला’ के रूप में प्रतिष्ठित किया गया था। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम को ‘मार्यादा पुरुषोत्तम’ के रूप में देखा जाता है — जो आदर्श व्यक्ति, आदर्श राजा और आदर्श मानवता का प्रतीक हैं।

22 जनवरी 2024 को इस मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा करने का काम संपन्न हुआ — यह दिन भारतीय धर्म‑इतिहास का एक यादगार और पावन पर्व बन गया। उस दिन से यह दिन भक्तों के लिए त्यौहार, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत बन चुका है।


🌟 भव्य आयोजन और तैयारियां

🛕 मंदिर परिसर में सजावट और पूजा‑आरती

राम जन्मभूमि मंदिर परिसर को इस अवसर के लिए पहले से भव्य रूप से सजाया गया है। मंदिर के हर कोने में फूलों, दीपों और रंगीन रोशनी के साथ भजन‑कीर्तन, आरती और धार्मिक मंत्रोच्चारण चल रहे हैं। सुबह के समय से ही भक्तों की लम्बी कतारें मंदिर में दर्शन‑पूजन के लिए लगी हैं।

📜 प्राचीन अनुष्ठान और मंत्रो‑उच्चारण

आज के दिन विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है — जिसमें भजन संध्या, रामकथा पाठ, सामूहिक हवन और पूजा‑अर्चना शामिल हैं। पंडित और ब्राह्मण मंत्रियों द्वारा मंत्रों का जाप लगातार किया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव की पूर्ण अनुभूति हो सके।

🚩 प्रशासन‑व्यवस्थाएँ और सुरक्षा

भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए अयोध्या प्रशासन, पुलिस और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सुरक्षा, भीड़‑प्रबंधन, ट्रैफिक नियंत्रण और मेडिकल सुविधाओं सहित तमाम व्यवस्थाएँ पहले ही व्यवस्थित कर दी हैं।


🧡 राष्ट्रीय और सामाजिक प्रभाव

🇮🇳 राजस्थान सरकार की सौगातें

रामलला की प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में राजस्थान सरकार ने किसानों, महिलाओं और मजदूरों के लिए कई महत्वपूर्ण लाभ योजनाओं की घोषणा की है। इस अवसर पर किसानों को किसान सम्मान निधि की पांचवीं किस्त, आवास सहायता वितरण, और ग्रामीण विकास के लिए ग्राम उत्थान शिविर जैसी योजनाओं का शुभारंभ किया गया।

यह कदम सामाजिक न्याय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के उत्थान की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो ग्रामीण और कमजोर वर्गों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में मदद करेगा।

🙌 जन‑मानस की एकता और आस्था

रामलला प्रतिष्ठा दिवस केवल एक धार्मिक समारोह नहीं है — यह विश्व भर के हिन्दू समाज की एकता, एक विचारधारा और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बन चुका है। भारत के हर कोने से लोगों का विशाल सैलाब अयोध्या की ओर आ रहा है, जिससे यह पवित्र नगरी आस्था‑प्रेमियों का प्रमुख केंद्र बन चुकी है।


📈 उत्सव का विस्तृत कार्यक्रम

🗓 प्रमुख आयोजन

इस वर्ष की दूसरी वर्षगांठ के उत्सव की शुरुआत दिसंबर 2025 के अंत से जनवरी 2026 की शुरुआत तक धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हुई थी, जिसमें जनसांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन‑कीर्तन, सांगीतिक प्रस्तुतियाँ, और धार्मिक प्रवचन शामिल थे।

मुख्य कार्यक्रम जनवरी के पहले सप्ताह में हुआ, जिसमें राज्य और केंद्र के कई गणमान्य व्यक्तियों ने विशेष तौर पर भाग लिया। इस दौरान मंदिर में ध्वजारोहण, रामलला की पूजा‑अर्चना और विशेष मंत्रोच्चारण जैसे धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए।

📿 प्रमुख तत्व

  • पंडितों द्वारा पूजन और धार्मिक मंत्रों का जाप

  • भजन‑कीर्तन और रामकथा

  • दीपोत्सव और प्रकाश समारोह

  • शांति और सामुदायिक प्रार्थनाएं

ये सारी गतिविधियाँ श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव और सांस्कृतिक आनंद का प्रतीक बन चुकी हैं।


📌 क्यों है यह सालगिरह इतिहास में महत्वपूर्ण?

रामलला प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हिन्दू संस्कृति में पुनर्जागरण, राष्ट्रीय चेतना और धार्मिक स्मृति का प्रतीक बन चुकी है। यह दिन यह याद दिलाता है कि भारतीय समाज ने अपनी सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक परंपराओं को सम्मान देने का निर्णय लिया है।

भगवान श्री राम को जन्मभूमि पर प्रतिष्ठित करने की यह प्रक्रिया केवल एक धार्मिक समारोह नहीं, बल्कि यह समाज की आध्यात्मिक ऊर्जा, भारतीयता की पहचान और संस्कृति के आत्म‑विश्वास का प्रतीक है।


🧭 भविष्य की संभावनाएँ

आने वाले समय में अयोध्या में रामलला की प्रतिष्ठा से जुड़े और भी बड़े धार्मिक कार्यक्रम और आयोजन तय हैं, जैसे कि राम नवमी महोत्सव तथा अन्य धार्मिक उत्सव, जहाँ देश‑विदेश से भक्त शामिल होंगे। इसके साथ ही धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की बड़ी संभावनाएँ भी विकसित हो रही हैं।


🔔 निष्कर्ष

अयोध्या में रामलला प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ ने न सिर्फ धार्मिक आस्था का महोत्सव बनाया है, बल्कि यह एक आध्यात्मिक‑सांस्कृतिक उत्सव, सामाजिक एकता का प्रतीक और राष्ट्रीय भावना का स्रोत भी बन गया है। लाखों श्रद्धालु आज इस पवित्र नगरी में भगवान श्री राम के चरणों में नमन कर रहे हैं, जिससे यह स्थान आज भी भारतीय आस्था और मानवीय भावना का सबसे ऊँचा केंद्र बना हुआ है। 

FAQs (Frequently Asked Questions)

Q1: रामलला प्रतिष्ठा दिवस कब मनाया जाता है?
A1: रामलला प्रतिष्ठा दिवस हर साल 22 जनवरी को मनाया जाता है, जो श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की वर्षगांठ है।

Q2: इस वर्ष कितने साल पूरे हुए?
A2: 22 जनवरी 2026 को रामलला की दूसरी वर्षगांठ मनाई गई।

Q3: रामलला प्रतिष्ठा दिवस का महत्व क्या है?
A3: यह दिन धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। यह हिंदू समाज की आस्था, संस्कृति और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक है।

Q4: अयोध्या में इस दिन क्या खास कार्यक्रम होते हैं?
A4: मंदिर में पूजा‑अर्चना, भजन‑कीर्तन, दीपोत्सव, रामकथा, सामूहिक हवन और धार्मिक अनुष्ठान होते हैं।

Q5: इस वर्ष कौन‑कौन से सुरक्षा और व्यवस्थाएँ की गईं?
A5: प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट ने भीड़‑प्रबंधन, ट्रैफिक नियंत्रण, मेडिकल सुविधा, सुरक्षा और भक्तों के लिए व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की हैं।

Q6: इस वर्ष के उत्सव का सामाजिक और राष्ट्रीय महत्व क्या है?
A6: यह उत्सव केवल धार्मिक नहीं है बल्कि सामाजिक एकता, संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक भी है। इसके साथ ही कई राज्य सरकारें इस अवसर पर लाभ योजनाएँ भी घोषित करती हैं।