दिल्ली में वायु गुणवत्ता गंभीर – AQI ‘बहुत खराब’, GRAP‑4 लागू और स्वास्थ्य चेतावनी
दिल्ली में वायु प्रदूषण: स्थिति और आंकड़े
दिल्ली का वायु प्रदूषण पिछले कई वर्षों से गंभीर समस्या बना हुआ है। जनवरी और फ़रवरी के महीनों में प्रदूषण अपने चरम पर पहुँचता है। इसका मुख्य कारण ठंडी हवाएँ और मौसम की स्थिरता है, जो धुएँ, धूल और औद्योगिक प्रदूषण को हवा में फैलने से रोकती है।
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AQI आंकड़े:
शनिवार, 21 जनवरी को AQI 343 दर्ज किया गया, जो “बहुत खराब” श्रेणी में आता है। इसी श्रेणी में आने पर आम लोग भी सांस लेने में कठिनाई महसूस कर सकते हैं, विशेष रूप से वृद्धजन, बच्चे और श्वसन रोग से पीड़ित लोग। -
मुख्य प्रदूषण स्रोत:
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वाहनों का धुआँ: दिल्ली‑NCR में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पेट्रोल और डीज़ल इंजन से निकलने वाला धुआँ हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
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निर्माण कार्य: निर्माण स्थलों से उठने वाली धूल और मलबा AQI को बढ़ाता है।
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उत्तरी भारत में खेतों में पराली जलाना: पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने से धुआँ दिल्ली की ओर बहता है।
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औद्योगिक धुएँ और घरेलू प्रदूषण: कोयला आधारित उद्योग और घरेलू हीटिंग, खाना पकाने के लिए लकड़ी या कोयला का उपयोग।
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GRAP‑4: क्या है और क्यों लागू हुआ?
GRAP (Graded Response Action Plan) भारत सरकार और दिल्ली सरकार द्वारा तैयार किया गया एक कदम-ब-कदम प्रदूषण नियंत्रण योजना है। इसका उद्देश्य वायु गुणवत्ता बिगड़ने पर त्वरित कार्रवाई करना है।
GRAP के तहत चार स्तर हैं:
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Stage I: हवा की गुणवत्ता “सांवधान” होने पर हल्की कार्रवाई।
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Stage II: “खराब” श्रेणी पर निर्माण कार्यों में सीमितता।
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Stage III: “बहुत खराब” पर स्कूलों और खुले स्थानों पर सावधानी।
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Stage IV (GRAP‑4): “गंभीर” स्तर, जिसमें उद्योग, निर्माण, पटाखे, पराली जलाना आदि पूरी तरह प्रतिबंधित होते हैं।
21 जनवरी 2026 को दिल्ली में GRAP‑4 लागू किया गया, क्योंकि AQI “बहुत खराब” श्रेणी में पहुँच गया।
GRAP‑4 के तहत किए गए कदम:
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स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर बच्चों और बुज़ुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
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सड़क और निर्माण कार्यों को सीमित करना।
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पटाखों और आग जलाने पर रोक।
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वाहनों की चेकिंग और इंडस्ट्रीज़ पर निगरानी।
स्वास्थ्य पर प्रभाव
बहुत खराब वायु गुणवत्ता का सबसे बड़ा असर स्वास्थ्य पर पड़ता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि AQI 300+ पर सांस की समस्याएँ और फेफड़ों की बीमारी होने का जोखिम बढ़ जाता है।
जो लोग अधिक प्रभावित हो सकते हैं:
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बच्चे और शिशु: सांस लेने में कठिनाई और एलर्जी।
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बुज़ुर्ग: फेफड़े और हृदय की समस्याओं में बढ़ोतरी।
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श्वसन रोगी: अस्थमा, ब्रोंकाइटिस वाले मरीजों को सतर्क रहने की जरूरत।
सावधानियां:
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घर के अंदर रहना और खिड़कियां बंद रखना।
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एन‑95 मास्क पहनना।
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एयर प्यूरीफायर का उपयोग करना।
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भारी व्यायाम और आउटडोर गतिविधियों से बचना।
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अधिक पानी पीना और फलों का सेवन बढ़ाना।
दिल्ली वायु प्रदूषण का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
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सड़क परिवहन पर असर: वाहन चालक और पैदल यात्रियों को सांस लेने में दिक्कत।
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शिक्षा: स्कूलों में बच्चों के लिए outdoor activities रद्द।
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पर्यटन और व्यवसाय: पर्यटक और कामकाजी लोग प्रभावित।
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स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव: अस्पतालों में सांस की समस्या वाले मरीज बढ़ जाते हैं।
दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के कदम
दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार ने कई योजनाएँ शुरू की हैं:
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EV (Electric Vehicles) प्रोत्साहन: पेट्रोल‑डीजल वाहनों की संख्या घटाने के लिए।
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पराली जलाने पर रोक: किसानों को पर्यावरण अनुकूल विकल्प देने के लिए।
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वाहनों का पैट्रनिंग और PUC चेक: प्रदूषण कम करने के लिए।
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आग और Construction Regulation: GRAP के तहत निर्माण कार्य नियंत्रित करना।
आम नागरिकों के लिए सुझाव
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हवा की स्थिति पर ध्यान दें और AQI ऐप या वेबसाइट चेक करें।
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बच्चों और बुज़ुर्गों को घर पर रखें।
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एन‑95 मास्क पहनें और लंबी दूरी की सैर कम करें।
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हवा को शुद्ध करने के लिए एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।
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निजी वाहन का उपयोग कम करें और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दें।
निष्कर्ष
दिल्ली और NCR में वायु प्रदूषण केवल एक पर्यावरणीय समस्या नहीं बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, और आर्थिक गतिविधियों पर असर डालने वाला संकट बन चुका है। GRAP‑4 का लागू होना आवश्यक कदम है ताकि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
दिल्लीवासियों को चाहिए कि वे प्रदूषण के इस खतरे को गंभीरता से लें और घर पर रहकर या मास्क पहनकर अपनी सुरक्षा करें। साथ ही, प्रदूषण नियंत्रण के लिए सभी नागरिकों को मिलकर जागरूक प्रयास करने होंगे, ताकि दिल्ली की हवा फिर से सांस लेने लायक और साफ़ हो सके।
दिल्ली की वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए सभी का सहयोग जरूरी है।

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