google.com, pub-4835475085531812, DIRECT, f08c47fec0942fa0 यूजीसी कानून पर सामान्य वर्ग का विरोध! BJP और मोदी सरकार के लिए बड़ी चुनौती

यूजीसी कानून पर सामान्य वर्ग का विरोध! BJP और मोदी सरकार के लिए बड़ी चुनौती

 यूजीसी के नए नियम पर सवर्ण वर्ग का विरोध, BJP की मुश्किलें बढ़ीं


नई दिल्ली: यूजीसी (UGC) के नए नियमों के खिलाफ सामान्य वर्ग (General Category) के छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। कई शहरों में प्रदर्शन और विरोध की खबरें हैं, वहीं कुछ छात्रों ने इस्तीफा देने की चेतावनी भी दी है। इस विवाद ने BJP और मोदी सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।

यूजीसी ने उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए नए नियम बनाए हैं। लेकिन सामान्य वर्ग के छात्र सवाल उठा रहे हैं कि क्या उनके लिए समानता के अधिकार लागू नहीं होंगे। छात्रों का कहना है कि नेता अपने बच्चों को विदेश में पढ़ाई के लिए भेजते हैं और नए नियम सिर्फ आम लोगों पर असर डालते हैं।


सुप्रीम कोर्ट में मामला

विरोध बढ़ने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। शिक्षा मंत्रालय को अदालत में अपने पक्ष का तर्क पेश करना होगा। यूजीसी की ओर से जल्द ही कोर्ट को पूरी जानकारी दी जाएगी। सुरक्षा बढ़ाने के लिए दिल्ली स्थित यूजीसी मुख्यालय पर भी अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं।


केंद्रीय शिक्षा मंत्री का बयान

धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया,

“कोई भेदभाव नहीं होगा। किसी को भी नियम का गलत इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं होगा। यह पूरी तरह संविधान के दायरे में होगा।”


नए नियमों पर तीन बड़े सवाल

  1. जातिगत भेदभाव की परिभाषा बढ़ी:
    2026 के नियमों में SC, ST और OBC छात्रों और कर्मचारियों के लिए भेदभाव की शिकायतों पर अनिवार्य कार्रवाई का प्रावधान है। सामान्य वर्ग के छात्र पूछ रहे हैं कि उनके अधिकार कहां हैं।

  2. झूठी शिकायतों पर कोई दंड नहीं:
    2012 के नियमों में झूठी शिकायत पर कोई सजा नहीं थी। 2025 के ड्राफ्ट में दंड की सिफारिश थी, लेकिन 2026 के नियम में इसे हटा दिया गया। तर्क यह है कि असली पीड़ित डर के बिना शिकायत कर सकें। विरोधियों का कहना है कि इससे झूठी शिकायतें बढ़ सकती हैं।

  3. समता समिति में प्रतिनिधित्व का सवाल:
    नए नियमों के अनुसार समता समिति में OBC, SC/ST, महिलाओं और दिव्यांगजन का प्रतिनिधित्व होगा। सामान्य वर्ग के छात्रों को इसमें प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।

छात्रों का सवाल है कि संविधान में समानता का अधिकार तो है, लेकिन कैंपस में यह क्यों लागू नहीं होता?