‘घूसखोर पंडत’ पर बवाल: नीरज पांडे की सफाई के बाद हटाया गया टीजर, जानिए पूरा विवाद
फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ रिलीज से पहले ही देशभर में विवाद का विषय बन गई है, जहां इसके टाइटल को लेकर ब्राह्मण समाज के कई संगठनों और लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि ‘पंडत’ शब्द सामान्य रूप से ब्राह्मण समाज और धार्मिक विद्वानों की पहचान से जुड़ा होता है, ऐसे में इसके साथ ‘घूसखोर’ शब्द जोड़ना पूरे समुदाय की छवि को गलत तरीके से प्रस्तुत करता है। बढ़ते विरोध और सोशल मीडिया पर नाराजगी के बीच फिल्म के लेखक और निर्माता नीरज पांडे ने शुक्रवार को आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि यह फिल्म पूरी तरह से काल्पनिक है और इसका किसी भी जाति, धर्म या समुदाय से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी के माध्यम से बताया कि फिल्म एक फिक्शनल पुलिस ड्रामा है, जिसमें ‘पंडत’ शब्द का इस्तेमाल केवल एक काल्पनिक किरदार के लिए आम बोलचाल के नाम के तौर पर किया गया है, न कि किसी सामाजिक या धार्मिक वर्ग का प्रतिनिधित्व करने के लिए। नीरज पांडे ने यह भी कहा कि कहानी का केंद्र बिंदु उस किरदार के काम, उसके फैसलों और नैतिक संघर्षों पर है, न कि उसकी जाति या धार्मिक पहचान पर। उन्होंने एक फिल्ममेकर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से लेने की बात कहते हुए यह भरोसा दिलाया कि वे हमेशा सम्मान और संवेदनशीलता के साथ कहानियां पेश करने का प्रयास करते हैं और यह फिल्म भी दर्शकों के मनोरंजन के उद्देश्य से ईमानदार नीयत के साथ बनाई गई है। विवाद को गंभीरता से लेते हुए मेकर्स और नेटफ्लिक्स इंडिया ने एहतियातन बड़ा कदम उठाया है और फिल्म का टीजर तथा उससे जुड़ा पूरा प्रमोशनल कंटेंट नेटफ्लिक्स इंडिया के सोशल मीडिया अकाउंट्स और यूट्यूब से हटा दिया गया है। नीरज पांडे ने अपने बयान में यह भी स्वीकार किया कि फिल्म के टाइटल से कुछ लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और वे उन भावनाओं का सम्मान करते हैं, इसी कारण फिलहाल प्रमोशनल सामग्री हटाने का फैसला लिया गया है। उन्होंने यह अपील भी की कि किसी भी फिल्म को उसके पूरे संदर्भ और कहानी के साथ देखा जाना चाहिए, न कि केवल कुछ झलकियों या टीजर के आधार पर उस पर राय बनाई जानी चाहिए। फिल्म का निर्देशन रितेश शाह ने किया है और इसे एक गंभीर पुलिस ड्रामा के रूप में पेश किया जाना था, लेकिन टाइटल को लेकर उठा विवाद अब इसके भविष्य पर सवाल खड़े कर रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में मेकर्स फिल्म के टाइटल या प्रमोशनल रणनीति में बदलाव कर सकते हैं, ताकि विवाद को शांत किया जा सके और दर्शकों तक फिल्म को बिना किसी गलतफहमी के पहुंचाया जा सके। गौरतलब है कि नीरज पांडे इससे पहले ‘ए वेडनेसडे!’, ‘स्पेशल 26’, ‘बेबी’, ‘एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ और ‘टॉयलेट: एक प्रेम कथा’ जैसी सफल और सामाजिक मुद्दों को छूने वाली फिल्मों के लिए जाने जाते हैं, जिनमें उन्होंने संवेदनशील विषयों को संतुलित तरीके से प्रस्तुत किया है। ऐसे में उनके बयान के बाद भी यह देखना दिलचस्प होगा कि दर्शक और विरोध करने वाले समूह इस सफाई को किस हद तक स्वीकार करते हैं और फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ आखिरकार किस रूप में दर्शकों के सामने आती है।

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