google.com, pub-4835475085531812, DIRECT, f08c47fec0942fa0 भारत-अमेरिका ट्रेड डील में बड़ा बदलाव, 50% टैरिफ घटकर 18% क्यों हुआ? जानिए पूरी कहानी

भारत-अमेरिका ट्रेड डील में बड़ा बदलाव, 50% टैरिफ घटकर 18% क्यों हुआ? जानिए पूरी कहानी

India-US Trade Deal: भारत में टैरिफ 50% से घटकर 18% कैसे हुआ? जानिए पूरी कहानी


भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि कुछ उत्पादों पर भारत का टैरिफ 50% से घटकर 18% तक कैसे और क्यों आया, और इसका भारतीय बाजार व किसानों पर क्या असर पड़ेगा। दरअसल, भारत लंबे समय से अपने कृषि, डेयरी और कुछ संवेदनशील औद्योगिक उत्पादों पर 30% से 50% तक ऊँचा आयात शुल्क (Tariff) लगाता रहा है, ताकि सस्ते विदेशी सामान से घरेलू किसानों और छोटे उद्योगों को बचाया जा सके। अमेरिका का लगातार यह आरोप रहा है कि भारत अत्यधिक टैरिफ लगाकर अमेरिकी उत्पादों को अपने बाजार से बाहर रखता है, खासकर कृषि, डेयरी, मेडिकल डिवाइसेज़ और कुछ इंडस्ट्रियल गुड्स में। डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान इस मुद्दे ने काफी तूल पकड़ा, जब उन्होंने भारत को “Tariff King” कहा और दबाव बनाया कि भारत अपने ऊँचे टैरिफ को घटाए, नहीं तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई करेगा। इसी दबाव और बातचीत के चलते कुछ गैर-संवेदनशील उत्पादों पर भारत ने चरणबद्ध तरीके से टैरिफ में कटौती की, जहाँ पहले 40–50% तक आयात शुल्क लगता था, उसे घटाकर औसतन 18% के आसपास लाया गया। यह कटौती सभी सेक्टरों में नहीं की गई, बल्कि मुख्य रूप से उन उत्पादों में की गई जहाँ घरेलू उद्योग पर सीमित असर पड़ता था या जहाँ भारत को अमेरिकी बाजार में बदले में लाभ मिलने की संभावना थी। अमेरिका का तर्क था कि 18% टैरिफ अंतरराष्ट्रीय मानकों के ज्यादा करीब है और इससे दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ेगा, जबकि भारत ने साफ किया कि यह रियायत केवल चुनिंदा उत्पादों तक सीमित रहेगी और कृषि व डेयरी जैसे संवेदनशील सेक्टरों में 50% या उससे अधिक सुरक्षा बनी रहेगी। भारत सरकार के अनुसार, टैरिफ को 50% से 18% तक लाने का फैसला पूरी तरह रणनीतिक था, ताकि एक तरफ अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव कम किया जा सके और दूसरी तरफ घरेलू किसानों और छोटे उद्योगों की सुरक्षा भी बनी रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह कटौती बिना संतुलन के की जाती, तो सस्ते अमेरिकी उत्पाद भारतीय बाजार में भर जाते और स्थानीय उत्पादकों को भारी नुकसान होता। यही वजह है कि भारत ने “वन-साइज़-फिट-ऑल” नीति अपनाने के बजाय सेलेक्टिव टैरिफ रिडक्शन का रास्ता चुना। कुल मिलाकर, भारत में टैरिफ का 50% से 18% तक आना किसी अचानक फैसले का नतीजा नहीं, बल्कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता, राजनीतिक दबाव और घरेलू हितों के बीच बनाए गए संतुलन का परिणाम है, जिसमें भारत ने व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ अपने किसानों और अर्थव्यवस्था की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।