google.com, pub-4835475085531812, DIRECT, f08c47fec0942fa0 ट्रंप का ‘बोर्ड ऑफ पीस’: भारत की चुप्पी, विशेषज्ञ बता रहे संभावित खतरे और रणनीतिक चुनौती”

ट्रंप का ‘बोर्ड ऑफ पीस’: भारत की चुप्पी, विशेषज्ञ बता रहे संभावित खतरे और रणनीतिक चुनौती”

 ट्रंप का ‘बोर्ड ऑफ पीस’: भारत की स्थिति और संभावित चुनौतियां


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अपनी नई पहल ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की शुरुआत की। इसका उद्देश्य ग़ज़ा में इसराइल और हमास के बीच संघर्षविराम को स्थायी बनाना और फ़लस्तीनी क्षेत्र में अंतरिम प्रशासन की निगरानी करना बताया जा रहा है।

भारत को निमंत्रण मिला, निर्णय अभी अनिश्चित

इस पहल में भाग लेने के लिए भारत सहित कई देशों को आमंत्रित किया गया है। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि भारत इसे स्वीकार करेगा या नहीं। ट्रंप ने जिन नेताओं को बोर्ड का हिस्सा बनने का न्योता दिया, उनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं।

जब ट्रंप ने बोर्ड की औपचारिक शुरुआत की, उस समय भारत का प्रतिनिधि समारोह में मौजूद नहीं था

किन देशों ने शामिल होने की सहमति दी?

ट्रंप के बोर्ड में शामिल होने के लिए पाकिस्तान, तुर्की, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश तैयार हैं। ट्रंप के अनुसार, कुल 59 देशों ने शामिल होने का संकेत दिया, लेकिन समारोह में केवल 19 देशों के प्रतिनिधि ही उपस्थित रहे

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत के लिए इस पहल में शामिल होना कुछ कूटनीतिक और रणनीतिक जोखिम ला सकता है। भारत की विदेश नीति हमेशा संतुलन पर आधारित रही है, इसलिए किसी भी अंतरराष्ट्रीय पहल में भाग लेने से पहले फायदे और नुकसान का पूरा मूल्यांकन करना जरूरी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को यह देखना होगा कि इस पहल में शामिल होने से मध्य-पूर्व में उसकी छवि और रणनीतिक स्थिति पर क्या असर पड़ सकता है।

निष्कर्ष

ट्रंप का ‘बोर्ड ऑफ पीस’ एक महत्वाकांक्षी अंतरराष्ट्रीय पहल है। भारत के लिए इसमें शामिल होना एक संवेदनशील निर्णय है, जिसमें राजनीतिक, कूटनीतिक और रणनीतिक सभी पहलुओं पर विचार करना जरूरी है। फिलहाल भारत ने इस मामले में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है और सभी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।